$BeCl_{2}$ में बंध निर्माण की व्याख्या कीजिए और समझाइए कि $BeCl_{2}$ रैखिक क्यों है।

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(N/A) $BeCl_{2}$ में,$Be$ का मूल अवस्था इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[He] 2s^{2}$ है।
दो बंध बनाने के लिए,$Be$ उत्तेजित होकर $Be^{*}$ में परिवर्तित हो जाता है,जिसका विन्यास $[He] 2s^{1} 2p^{1}$ होता है।
उत्तेजित $Be$ परमाणु का एक $2s$ और एक $2p$ कक्षक $sp$ संकरण से गुजरकर दो समान $sp$ संकर कक्षक बनाते हैं।
ये दो $sp$ संकर कक्षक प्रतिकर्षण को कम करने के लिए विपरीत दिशाओं में व्यवस्थित होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप $180^{\circ}$ का बंध कोण प्राप्त होता है।
$Be$ का प्रत्येक $sp$ संकर कक्षक क्लोरीन $(Cl)$ परमाणु के अर्ध-पूर्ण $3p_{z}$ कक्षक के साथ अक्षीय रूप से अतिव्यापन (overlap) करता है,जिससे दो $Be-Cl$ $\sigma$ बंध बनते हैं।
दो $sp$ संकर कक्षकों की इस रैखिक व्यवस्था के कारण,$BeCl_{2}$ अणु रैखिक ज्यामिति प्राप्त करता है।

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निम्नलिखित तालिका से सही सेट की पहचान करें:
अणुकेंद्रीय परमाणु का संकरणआकार
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$(b)$ $[Ni(CN)_4]^{2-}$$sp^3$चतुष्फलकीय
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जैसे-जैसे संकरित कक्षक का $s-$लक्षण घटता है,बंध कोण

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